Wednesday, 25 June 2025

अजय पाल मंदिर कन्नौज

अजयपाल का मन्दिर : - 
वर्तमान नगर के मध्य में लगभग पूर्व की ओर बड़ी ऊँचाई पर यह मन्दिर स्थित है। पूज्यपाद श्री अजयपाल महाराजा जयचन्द के गुरु थे और उन्हीं की स्मृति में महाराज ने यह मन्दिर बनवाया था। मन्दिर के भीतर महात्मा अजय-पाल की मूर्ति स्थापित है। लाल पत्थर में बनी हुयी यह मूर्ति हाथ में शूल (त्रिशूल) पकड़े है। वर्तमान में मूर्ति के हाथ में पुस्तक है। थद्धावान जन श्रावण के माह में इस पर शरबत और बताशे चढ़ाते हैं। वर्तमान मन्दिर तीन-चार सौ साल से अधिक पुराना नहीं है किन्तु उक्त स्थान प्राचीन है।

पद्मपुराण में जयपाल (पूर्वलिखित अजयपाल नहीं) का निर्देष आता है और यह लिखा है-

जयपालो महावीरश्चक्रवर्ती धनेश्वरः । 
आसीत्पुरा कृत युगे राज्यं त्यक्त्वा महीपतिः ।।"

अर्थात् जयपाल महावीर चक्रवर्ती तथा धन सम्पन्न नृपति सत्ययुग में हुये थे और जो राज्य को त्याग कर विरक्त हो गये थे। उक्त पुराण में यह भी लिखा है उन्होंने योग कर सब सिद्धियों को प्राप्त किया था तथा वह सब सिद्धियों सहित चारों युगों में वहाँ निवास करते हैं। वहाँ स्नान कर पक्वान द्वारा महात्मा जयपाल की पूजा करने से सिद्धि प्राप्त होती है।

उपरलिखित विभिन्न विवरणों से ऐसा समझ पड़ता है कि चक्रवर्ती महाराज जयपाल जयचन्द के गुरु अजयपाल से भिन्न थे। यह भी सम्भव है कि आदि जयपाल स्वामी के उत्तराधिकारी इस स्थान (पीठ) के मठाधीश होते रहे हों और जयपाल (अथवा अजयपाल) के नाम से विख्यात रहे हों। इस प्रकार जो मठा-घीश महाराज जयचन्द के समय में विराजमान रहे हों उन्हें महाराज ने अपना गुरु माना हो। आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित परिपाटी भी इसी प्रकार की है जिसके अनुसार भारत की चारों पीठों के पीठाधीश शंकराचार्य के नाम से जाने जाते हैं। उक्त बात का समर्थन इससे होता है कि पद्म पुराण के अनुसार महात्मा जयपाल सदैव वहाँ निवास करते हैं। यथा-

चतुर्य्यगेषु वसितः सर्वं सिर्द्धनिषेवितः ॥३

अर्थात् सब सिद्धियों के सहित वे चारों युगों में वहाँ निवास करते हैं।

वर्तमान मंदिर में पुजारी परिवार रहता और सेवा करता है।

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