ये है राजा वासुकी की प्रतिमा जिनका मंदिर कन्नौज के डाहलेपुर बांगर में है। खास बात यह प्राण प्रतिष्ठित प्रतिमा मंदिर में विराजमान नहीं रहती। करीब साढ़े तीन फीट की पत्थर की यह मूर्ति जमीन के भीतर दबाकर रखी जाती है। हे तीसरे साल भादों माह की ऋषि पंचमी को दो दिन के लिए निकली जाती है। इसके बाद पूजा अर्चना के साथ बड़ा मेला भी लगता है। तीसरे डेनिस प्रतिमा को वापस जमीन में दबा दिया जाता है। कारण पूछने पर स्थानीय बताते हैं कि पाताल के राजा हैं इसलिए यह परंपरा है। कुछ भी है बात तो अनूठी है।
Sunday, 24 May 2026
Thursday, 2 April 2026
राजा तिर्वा कन्नौज
राजा महाराजाओं की श्रंखला में तिर्वा संभवत :सबसे पुरानों में से एक परिवार है।सन् 1697 में बादशाह औरंगजेब द्वारा प्रताप सिंह के सबसे बड़े बेटे समर सिंह को 'राजा' की उपाधि और 3000 का मनसब प्रदान किया गया था।इसी के साथ तिर्वा राज परिवार की औपचारिक स्थापना हुई।बघेल वंश के राजा तिर्वा उदित नारायण सिंह 1857 में 2 वर्ष के थे। मां के अधीन तिर्वा स्टेट के मुखिया घोषित किये गये। म्यूटिनी के बाद बालिग होने पर राजा तिर्वा घोषित हुऐ।फर्रूखाबाद मैनपुरी,इटावा और कानपुर में अनेकों गांव इनकी स्टेट के अधीन आते थे।राजा तिर्वा लगभग डेढ़ लाख रुपया रेवेन्यू अदा करते थे।राजा दुर्गा नारायन सिंह तिर्वा स्टेट के आखिरी राजा थे। राजा के परिवार का अंग्रेजों से काफी अच्छा सहयोग था।इर्विन के अनुसार 1857 में विद्रोहियों की जायदाद जप्त कर राजाओं या नवाबों को बेच दी जाती थी।इसी परम्परा का अनुसरण करते तिर्वा में भी विद्रोहियों की जमीनें जब्त कर राजा तिर्वा व अन्य जमीदारों को बेंच दी जाती थी?मुगल काल या ब्रिटिश काल में राजा या नवाब का खिताब उन्हीं लोगों को दिया जाता था जो आज्ञा का अक्षरशः पालन करें।राजा दुर्गा नारायन सिंह को भारतीय सेना में 'मेजर' का पद दिया गया था,और साथ ही लॉर्ड लिनलिथगो द्वारा उन्हें 'राजा बहादुर' की निजी उपाधि भी प्रदान की गई थी।शिक्षा के विकास में तिर्वा स्टेट का योगदान अच्छा देखने को मिलता है।1923 में अपनी दिवंगत पत्नी की याद में तिरवा में एक इंटरमीडिएट कॉलेज शुरू किया।और कॉलेज को सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि दान में दे दी। कॉलेज की मुख्य इमारत उनके महल से कहीं ज़्यादा बड़ी और शानदार है। फतेहगढ़ में राजा दुर्गा नारायन सिंह के नाम डीएन डिग्री कालेज की स्थापना की।कुंवर दिग्विजय नारायन सिंह पौत्र राजा दुर्गा नारायन सिंह विन्टेज कारों के बेहद शौकीन थे।राजा साहब रेयर रौल्स रौये कार के बड़े शौकीन थे।विन्टेज कार रैली एसोसियेशन लखनऊ के अध्यक्ष भी थे| इसी परिवार के एस.एन. सिंह विन्टेज कार रैली के जाने माने फोटोग्राफर थे।परिवार ने तिर्वा में एक विशाल श्री अन्नपूर्णा देवी मंदिर का निर्माण करवाया था।जिसकी मान्यता आस पास के सभी जिलों में फैली है।साऊथ इंडियन आर्किटेक्चर में बना मंदिर जिले का बेहतरीन मंदिर है।
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